
रात्रि, सोने से पूर्व, बिस्तर पर लेट जायें, कमरे में अंधेरा कर लें, और आंख बन्द कर के जोर से श्वास मुंह से बाहर निकालें.
निकालने से शुरू करें- एग्जेहलेशन, लेने से नहीं, निकालने से. जोर से श्वास मुंह से बाहर निकालें, और निकालते समय 'ओssssss' की ध्वनि करें. जैसे-जैसे ध्वनि साफ होने लगेगी, 'ओम्' अपने-आप निर्मित हो जायेगा; आप सिर्फ ओssssss का उच्चार करें. ओम् का आखिरी हिस्सा, अपने-आप जैसे ध्वनि व्यवस्थित होगी- आने लगेगा.
आपको 'ओम्' कहना है- 'म्' को आने देना है. पूरी श्वास बाहर फेंक दें, फिर होंठ बन्द कर लें और शरीर को श्वास लेने दें. आप मत लें. निकालना आप को है, लेना शरीर को है, लेने का काम शरीर कर लेगा. श्वास रोकनी नहीं है. लेते समय आप को कुछ भी नहीं करना है- न लेना है, न रोकना है- बस छोड़ना है.
तो दस मिनट तक ओssssss की आवाज के साथ श्वास को छोड़ें- मुंह से, फिर नाक से श्वास लें, फिर मुंह से छोड़ें फिर नाक से लें....और ऐसे ओsss की आवाज करते-करते से जायें. इससे निद्रा गहरी और स्वप्नहीन हो जायेगी तथा सुबह उठने पर एक अपूर्व ताजगी का अनुभव होगा.
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